प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) एक प्रमुख सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य देशभर में जनता को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत स्थापित जन औषधि केंद्र (JAKs) पर दवाइयों की कीमतें ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक कम होती हैं। इस लेख में हम इस योजना की वर्तमान स्थिति, इसकी लोकप्रियता और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की संख्या और बिक्री में वृद्धि
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी देखी जा रही है। जून 2024 तक देशभर में 12,616 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे थे, जबकि जून 2023 में यह संख्या 9,512 थी। इस योजना के तहत दवाइयों की बिक्री में भी 2024 में बढ़ोतरी देखी गई। जून 2024 में इन केंद्रों ने ₹137.56 करोड़ की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के ₹113.24 करोड़ की तुलना में 21.5 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि, मई 2024 के ₹161.91 करोड़ की बिक्री से तुलना करें तो जून 2024 की बिक्री में 15% की गिरावट देखी गई। इस प्रकार, सालाना वृद्धि के बावजूद महीने के आधार पर उतार-चढ़ाव जारी हैं। लेकिन, इस योजना के तहत कुल मिलाकर दवाइयों की बिक्री और जन औषधि केंद्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो योजना की सफलता और लोकप्रियता को दर्शाती है।
| महीना | बिक्री (₹ करोड़) | सेंटरों की संख्या |
| जून 2023 | 113.24 | 9,512 |
| जून 2024 | 137.56 | 12,616 |
| अक्टूबर 2024 | 14082 |
जन औषधि योजना से उपभोक्ता बचत
जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपभोक्ताओं ने बड़ी मात्रा में बचत की है। डेटा से यह भी पता चलता है कि इन जन औषधि केंद्रों से उपभोक्ताओं की बचत जून 2024 में 1.3 प्रतिशत बढ़कर ₹687.60 करोड़ हो गई, जो पिछले साल जून में ₹679 करोड़ थी। हालांकि, अगर मई 2024 की तुलना करें तो उस महीने में बचत ₹809.55 करोड़ थी, जो जून 2024 में इससे काफी कम हो गई। यह दर्शाता है कि उपभोक्ताओं की बचत में जून में गिरावट आई है। इसके बावजूद, इस योजना ने जनता को बड़ी मात्रा में सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराई हैं और हर दिन करीब 10-12 लाख लोग इन केंद्रों से लाभ उठा रहे हैं।
जेनेरिक दवाओं और उत्पादों की संख्या में वृद्धि
प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत उपलब्ध दवाओं और सर्जिकल उत्पादों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। जून 2023 में इस योजना के तहत 1,800 दवाइयां और 285 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध थे, जो जून 2024 में बढ़कर 2,047 दवाइयां और 300 सर्जिकल उत्पाद हो गए। सरकार का लक्ष्य मार्च 2025 तक इन उत्पादों की संख्या को 2,000 दवाइयों और 300 सर्जिकल उत्पादों तक बढ़ाना है।
भविष्य की योजनाएँ
भारत सरकार ने 2026 तक जन औषधि केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 25,000 करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि सरकारी अस्पतालों में भी जन औषधि केंद्र खोले जा सकें। इसके तहत निजी व्यक्तियों को मुफ्त स्थान देकर इन केंद्रों को खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना से जुड़े व्यक्ति को प्रत्येक दवा की अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) का 20% मुनाफा भी मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की लोकप्रियता के कारण
- सस्ती दवाइयाँ: जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयों की कीमतें ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में काफी कम होती हैं। ये दवाइयाँ 50-90% तक सस्ती होती हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय लोग आसानी से इनका लाभ उठा सकते हैं।
- उपलब्धता और पहुंच: देशभर में तेजी से बढ़ती जन औषधि केंद्रों की संख्या और सरकार की योजना इन्हें 2026 तक 25,000 तक पहुंचाने की है। इससे इन केंद्रों की पहुंच ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक बढ़ेगी।
- गुणवत्ता: जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाइयाँ पूरी तरह से गुणवत्तापूर्ण और सरकारी मानकों के अनुसार होती हैं, जिससे लोगों का भरोसा बना रहता है।
- बचत: पिछले 9 वर्षों में इस योजना के माध्यम से देशवासियों को ₹28,000 करोड़ की अनुमानित बचत हुई है, जो इसे एक बेहद सफल योजना बनाती है।
चुनौतियाँ
- गिरती बिक्री: मासिक आधार पर बिक्री में गिरावट एक चिंता का विषय है। मई 2024 के मुकाबले जून 2024 में बिक्री में 15% की गिरावट देखी गई। इस प्रकार की गिरावट से योजना के प्रति जनता का रुझान कम हो सकता है।
- जन जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई लोग इस योजना और इसके फायदों से अनजान हैं। योजना के प्रचार-प्रसार में वृद्धि से इसका और अधिक लाभ उठाया जा सकता है।
- समान उपलब्धता: कुछ इलाकों में अभी भी सभी प्रकार की दवाइयाँ उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को परेशानी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) ने देशभर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना की सफलता का प्रमुख कारण इसकी पहुंच और सस्ते दाम हैं।
हालांकि, कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, जैसे कि बिक्री में उतार-चढ़ाव और जन जागरूकता की कमी। यदि इन चुनौतियों को समय रहते दूर किया जाए, तो यह योजना आने वाले वर्षों में और अधिक सफल हो सकती है और 2026 तक 25,000 जन औषधि केंद्रों का लक्ष्य प्राप्त कर सकती है।
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